स्वामी टेऊँराम साप्ताहिक जन्मोत्सव पर संतों ने बांटे परिंडे; कहा- पक्षियों की सेवा से मिलता है पुण्य और मानसिक शांति
जयपुर (सिन्धु गौरव न्यूज़)
आस्था के पावन केंद्र श्री अमरापुर स्थान, जयपुर में जीव-दया और सेवा का अनुपम उदाहरण पेश किया गया है। शनिवार को सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के साप्ताहिक जन्म दिवस के पावन अवसर पर मण्डल द्वारा बेजुबान पक्षियों के लिए परिंडा वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान को देखते हुए संतों के सान्निध्य में श्रद्धालुओं को परिंडे वितरित किए गए।
भटकते पक्षियों का सहारा बनें परिंडे
इस अवसर पर उपस्थित संतों ने मानवता का संदेश देते हुए कहा कि “बेजुबान पक्षियों में भी जान होती है।” अक्सर ग्रीष्म ऋतु में तापमान की अधिकता के कारण ये नन्हे पक्षी जल और दाने की तलाश में मिलों भटकते हैं और प्यास के कारण दम तोड़ देते हैं। संतों ने आह्वान किया कि:
- प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर की छत, बालकनी या पास के पेड़ों पर परिंडे अवश्य लगाने चाहिए।
- इन परिंडों में नियमित रूप से स्वच्छ जल और दाना रखना सुनिश्चित करें।
- ऐसा करने से बेजुबानों को जल की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा और अनमोल जीवन की रक्षा हो सकेगी।

संतों के सान्निध्य में श्रद्धालुओं को परिंडे वितरित किए गए
सेवा से बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण साझा करते हुए संतों ने बताया कि पक्षियों की सेवा करना केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि महान आध्यात्मिक पुण्य का आधार है। परिंडा अभियान से जुड़ने के लाभ बताते हुए उन्होंने कहा कि:
- पुण्य की प्राप्ति: प्यासे पक्षी की प्यास बुझाना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है।
- ग्रह दोष निवारण: दाना-पानी देने से कुंडली के विभिन्न ग्रहों के दोषों का निवारण होता है।
- मानसिक शांति: प्रकृति और जीवों के साथ जुड़ने से मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
स्वामी टेऊँराम जी महाराज का सेवा दर्शन
संत मोहन लाल जी महाराज (संत मोनूराम जी) ने बताया कि स्वामी टेऊँराम जी महाराज हमेशा कहते थे कि ईश्वर केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हर जीव मात्र में वास करता है। आज का यह परिंडा वितरण अभियान स्वामी जी की उन्हीं शिक्षाओं को धरातल पर उतारने का एक प्रयास है।
इस पुण्य कार्य में श्री अमरापुर स्थान प्रेम प्रकाश सेवा मण्डली के सदस्य और बड़ी संख्या में जयपुर के श्रद्धालु सम्मिलित हुए, जिन्होंने अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे लगाने का संकल्प लिया।

