आध्यात्मिक भक्ति, चरित्र निर्माण और सेवा के गुणों का होगा बोध; होनहार बच्चों को समापन पर किया जाएगा सम्मानित
जयपुर (सिन्धु गौरव न्यूज़)
आस्था के पावन केंद्र श्री अमरापुर स्थान, जयपुर में आगामी 17 मई, रविवार से पंद्रह दिवसीय ‘अमरापुर बाल संस्कार शिविर’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। आधुनिकता के दौर में बच्चों को सनातन संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए यह शिविर प्रातः 9 बजे से 11 बजे तक संचालित किया जाएगा।
5 से 20 वर्ष तक के बच्चों के लिए सुनहरा अवसर
इस पंद्रह दिवसीय शिविर में 5 वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक के सभी आयु वर्ग के बच्चे और युवा भाग ले सकते हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों में सकारात्मक सोच विकसित करना और उन्हें अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ना है।
संतों का सान्निध्य बनेगा प्रेरणा
श्री अमरापुर स्थान के संतों का कहना है कि बचपन में बोए गए संस्कार ही भविष्य में एक वटवृक्ष का रूप लेते हैं। यह शिविर बच्चों को न केवल एक अच्छा इंसान बनाएगा, बल्कि उन्हें अपने धर्म और संस्कृति का गौरवशाली वाहक भी तैयार करेगा। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट की आभासी दुनिया से बाहर निकालकर अपनी जड़ों और गौरवशाली सिन्धु संस्कृति से जोड़ने के लिए यह शिविर एक मील का पत्थर साबित होगा।

17 मई है पंजीयन की अंतिम तिथि
शिविर में भाग लेने के इच्छुक विद्यार्थियों का पंजीयन अनिवार्य है।
- पंजीयन का समय: प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक।
- अंतिम तिथि: 17 मई, रविवार। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय के भीतर बच्चों का पंजीकरण सुनिश्चित करें।
अनुभवी अध्यापकों और संतों का मिलेगा मार्गदर्शन
शिविर के अंतर्गत पूज्य संत महात्माओं के सान्निध्य के साथ-साथ अनुभवी अध्यापक जितेन्द्र दाधीच बच्चों में संस्कारों की नींव रखेंगे। धर्म और संस्कृति को जीवित रखने के ध्येय से शिविर में निम्नलिखित विषयों का बोध कराया जाएगा:
- योग और सूर्य नमस्कार: शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए।
- शास्त्रीय ज्ञान और मंत्र: आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के लिए।
- चरित्र निर्माण: सनातन धर्म, संस्कृति और सकारात्मक सोच का विकास।
- सेवा भाव: बच्चों में परोपकार और सेवा के गुणों को विकसित करना।
नियमों का पालन और पुरस्कार योजना
श्री अमरापुर स्थान, जयपुर के पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज ने बताया कि शिविर पूर्णतः नियमानुरूप और अनुशासन के साथ संचालित किया जाएगा।
- नियमितता: सभी बच्चों को 15 दिन तक समय पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
- सामग्री: शिविर में उपयोग होने वाली समस्त पाठ्य सामग्री वहीं उपलब्ध करवाई जाएगी।
- मूल्यांकन: समय-समय पर अध्यापकों द्वारा विद्यार्थियों की परीक्षा भी ली जाएगी।
- सम्मान: शिविर के समापन पर होनहार और जुझारू बच्चों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।

