पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर धानक्या में भव्य समारोह; विचार को केवल शोध तक सीमित न रख आचरण व ग्रामीण स्वावलंबन में उतारने का आह्वान
जयपुर (सिन्धु गौरव न्यूज़)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारत को भारत बनाने की युगांतरकारी जीवन दृष्टि दी और इसे केवल देश के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के समक्ष एक संपूर्ण जीवन मॉडल के रूप में रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानवदर्शन किसी दल, वर्ग या देश विशेष की सीमाओं में बंधा नहीं है, बल्कि यह समस्त मानवता के शाश्वत कल्याण का पावन मार्गदर्शक है। होसबाले शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति द्वारा जयपुर के धानक्या में आयोजित भव्य समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
पूंजीवाद व साम्यवाद से परे समग्र भारतीय जीवन दृष्टि

अतिथियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की
एकात्म मानवदर्शन की दार्शनिक पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए होसबाले ने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने उपनिषदों का सार श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में मानवता को सौंपा, उसी प्रकार दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को आधुनिक युगानुकूल बनाकर एकात्म मानवदर्शन के रूप में प्रस्तुत किया।
- व्यवस्थाओं की सीमाएं: पूंजीवाद में स्वतंत्रता के अतिरेक ने आर्थिक असमानता और शोषण को जन्म दिया, तो साम्यवाद में समानता की आड़ में मानवीय स्वतंत्रता ही छिन गई। इन दोनों प्रणालियों में पारस्परिक बंधुत्व और मानवीय संवेदनाओं की घोर उपेक्षा हुई।
- चार अंगों का समन्वय: भारतीय मनीषा व्यक्ति, समाज, सृष्टि और परमेश्वर के अंतर्संबंधों को संतुलित आधार मानकर संपूर्ण समाज जीवन की रचना करती है।
- भारत को भारत बनाना लक्ष्य: उन्होंने दोहराया कि भारत को किसी पश्चिमी राष्ट्र की नकल करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपनी मौलिक संस्कृति व मानवीय मूल्यों के आधार पर विश्व का मार्गदर्शन करना है।
ग्रामीण स्वावलंबन: पढ़ाई, दवाई और कमाई से रुकेगा पलायन

सरकार्यवाह ने इस जीवन दर्शन को कोरे बौद्धिक विमर्श और शोध प्रबंधों से बाहर निकालकर सामाजिक व्यवहार में लागू करने पर जोर दिया।
- गांवों का सशक्तिकरण: यदि प्रत्येक गांव में पढ़ाई, दवाई और कमाई के साधन सुलभ हों, तो शहरों की ओर होने वाला अनियंत्रित पलायन स्वतः रुक जाएगा।
- नानाजी देशमुख के प्रयोग: उन्होंने चित्रकूट और गोंडा में नानाजी देशमुख द्वारा किए गए ग्राम-विकास के अभिनव प्रयोगों का उल्लेख करते हुए स्थानीय रोजगार, कुटीर उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया।
- मानवकेंद्रित तकनीक: दीनदयाल उपाध्याय तकनीक के विरोधी नहीं थे, लेकिन उनका मत था कि तकनीक मनुष्य को साधन संपन्न बनाए, उसे गुलाम न करे। आधुनिक एआई (AI) और प्रौद्योगिकी को पर्यावरण, मानवीय गरिमा और रोजगार संवर्धन के अनुकूल होना चाहिए।
शोधार्थियों, विभूतियों एवं पद्मश्री कलाकारों का नागरिक अभिनंदन
समारोह में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर शोध कार्य करने वाले विद्वानों और लोक कलाकारों को मंच से सम्मानित किया गया:
- शोधार्थी सम्मान: रांची विश्वविद्यालय के डॉ. सोहन सिंह, हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. जगदीश सिंह चंदेल, मथुरा के डॉ. अंशुमान कौशिक एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. नागेश चौबे को सम्मानित किया गया।
- विशिष्ट लोक कलाकार: लोक कला और संगीत संवर्धन के लिए अलगोजा वादक पद्मश्री तगाराम भील एवं भपंग वादक पद्मश्री गफरुद्दीन मेवाती का विशेष नागरिक अभिनंदन किया गया।
समारोह की अध्यक्षता उद्यमी मनीष गुप्ता ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जेईसीआरसी विश्वविद्यालय के अध्यक्ष ओपी अग्रवाल उपस्थित रहे। स्मृति समारोह समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहनलाल छीपा ने समिति के उद्देश्यों और सचिव प्रताप भानु शेखावत ने भावी कार्ययोजनाओं पर प्रकाश डाला। उपाध्यक्ष नीरज कुमावत ने आभार ज्ञापित किया तथा मंच संचालन गजेंद्र ज्ञानपुरिया ने किया।


