13 वर्षों में 118 जोड़ों का घर बसा चुकी भगवान झूलेलाल सेवा समिति; संतों का मिला आशीर्वाद, भामाशाहों ने भेंट किया नई गृहस्थी का संपूर्ण सामान
जयपुर (सिन्धु गौरव न्यूज़)
सिन्धी समाज में अबूझ सावे के रूप में मान्य ‘बन बधड़ी’ (वामन द्वादशी) के पावन अवसर पर राजधानी के न्यू सांगानेर रोड स्थित लायंस पैराडाइज में भव्य सामूहिक विवाह समारोह हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ। भगवान झूलेलाल सेवा समिति, मानसरोवर के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में 9 जोड़े सनातन वैदिक पद्धति और सिन्धी रीति-रिवाजों के अनुसार परिणय सूत्र में बंधे। घोड़ियों पर सवार दूल्हों की बारात, बैंड-बाजों की मधुर धुनें और महिलाओं के पारंपरिक छेज़ नृत्य ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
अग्रवाल फार्म से निकली भव्य बारात, वैदिक मंत्रोच्चार से हुए फेरे

विवाह समारोह का शुभारंभ दोपहर 2 बजे अग्रवाल फार्म स्थित शीशमहल झूलेलाल मंदिर से हुआ, जहाँ से 9 दूल्हों की भव्य बारात गाजे-बाजे के साथ रवाना होकर विवाह स्थल पहुँची।
- पल्लव प्रार्थना व फेरे: विवाह स्थल पर पल्लव प्रार्थना, भगवान श्री गणेश एवं इष्टदेव भगवान झूलेलाल की विधिवत आराधना के साथ रस्में शुरू हुईं। पंडित सतीश शर्मा के आर्चायत्व में विद्वान पंडितों ने भगवान भुवन भास्कर व अग्निदेव को साक्षी मानकर विवाह संस्कार संपन्न कराए।
- संतों का पावन सान्निध्य: समारोह में श्री अमरापुर दरबार की संत मंडली, पूज्य पुरसनाराम दरबार के सांई मुकेश साध एवं मुख्य संरक्षक सुंदर ठाकुर सहित समाज के गणमान्य नागरिकों ने नवदम्पतियों को सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।
- बारात में सहभागिता: बारात व अगवानी में गिरधारी संभनानी, लालचंद खानवानी, मूलचंद बसंताणी, प्रमोद नावानी, शोभा बसंताणी, रजनी ग्वालानी एवं सीमा गोलानी सहित अनेक प्रबुद्धजन शामिल हुए।
13 साल में 118 विवाह: एक मां की गुहार से शुरू हुआ था सेवा का कारवां
समिति का यह सेवा अभियान त्याग और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल है। 13 वर्ष पूर्व वर्ष 2013 में एक निर्धन मां अपनी बेटी के विवाह की चिंता लेकर समाजसेवी गिरधारी संभनानी के पास पहुँची थी। उस एक पुकार ने इस पुनीत संकल्प को जन्म दिया और तब 4 कन्याओं के विवाह से शुरू हुआ यह सफर आज 118 निर्धन व जरूरतमंद जोड़ों के सफल विवाह तक पहुँच चुका है। इस वर्ष आयोजन को सफल बनाने में मातृशक्ति की 65 महिलाओं सहित लगभग 250 कार्यकर्ताओं ने समर्पित भाव से सेवाएं दी।
नई गृहस्थी बसाने के लिए भामाशाहों ने दिल खोलकर सौंपे उपहार

प्रवक्ता मूलचन्द बसंतानी ने बताया कि चौमासे के दौरान विवाह मुहूर्त न होने पर वामन जयंती/द्वादशी के अबूझ सावे पर सामूहिक विवाह कराने की प्राचीन परंपरा रही है। नवविवाहित जोड़ों को आत्मनिर्भर गृहस्थी शुरू करने हेतु करीब 140 उपयोगी उपहार भेंट किए गए:
- स्वर्ण आभूषण व वस्त्र: श्री अमरापुर दरबार की ओर से कन्या को साड़ी, गोवर्धन आसनानी द्वारा स्वर्ण मंगलसूत्र, प्रमोद नावानी द्वारा स्वर्ण अंगूठी, दीनदयाल वाधवानी द्वारा दूल्हे का सूट एवं शोभा बसंताणी द्वारा दुल्हन का बेस प्रदान किया गया।
- इलेक्ट्रॉनिक्स व घरेलू फर्नीचर: हनी लखवानी की ओर से ब्रांडेड फ्रिज, नन्दलाल वासुजा द्वारा वाशिंग मशीन एवं धीरज विशनानी द्वारा ड्रेसिंग टेबल भेंट की गई। इसके अलावा बर्तन, बिस्तर, सिलाई मशीन सहित गृहस्थी का संपूर्ण सामान दिया गया।
- सेवादारों का सराहनीय योगदान: आयोजन व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में कन्हैयालाल लखवानी, किशनचंद कुंदनानी, अर्जुन ढोलानी, भागचंद बच्चानी, पम्मनमल सोढानी एवं केसामल खानवानी सहित अनेक सेवादारों का सराहनीय योगदान रहा।


